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'I have to make my own dog food' - voters counting living costs on eve of election

India Lerigo makes her own dog food and batch cooks a month's worth of meals over a weekend to save money. from BBC News https://ift.tt/FvU3xHX via IFTTT

Lidl's new loyalty scheme less generous, shoppers say

Under the changed system customers collect points rather than reward coupons, with £1 spent equalling one point. from BBC News https://ift.tt/fG8w510 via IFTTT

"द साबरमती रिपोर्ट्स" The Sabarmati Report | Official Trailer | Vikrant M, Raashii K, Ridhi D | Ektaa K | InCinemas Nov 15

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  "द साबरमती रिपोर्ट्स" - एक बहुप्रतीक्षित फिल्म फिल्म "द साबरमती रिपोर्ट्स" का इंतजार दर्शकों में काफी बढ़ गया है। इस फिल्म के निर्देशक प्रकाश झा ने इसे बहुत ही संवेदनशील और विचारोत्तेजक विषय पर बनाया है। यह फिल्म उन मुद्दों को उजागर करती है जो समाज के भीतर गहरे स्तर पर छुपे हुए हैं और कई बार अनदेखे रह जाते हैं। फिल्म का शीर्षक "साबरमती रिपोर्ट्स" भी अपने आप में रहस्यपूर्ण है और यह दर्शाता है कि फिल्म में समाज के कड़वे सच को दिखाने का प्रयास किया गया है। कहानी और विषयवस्तु फिल्म की कहानी गुजरात के साबरमती क्षेत्र की घटनाओं पर आधारित है, जहां कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों का विस्तार से विश्लेषण किया गया है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कुछ ताकतें समाज को विभाजित करने की कोशिश करती हैं और किस तरह कुछ लोग इन मुद्दों के खिलाफ खड़े होकर सच्चाई की लड़ाई लड़ते हैं। यह फिल्म जातीय और धार्मिक संघर्ष, न्याय व्यवस्था, और राजनीतिक दवाब जैसे संवेदनशील विषयों को बेबाकी से प्रस्तुत करती है। कलाकार फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में कई शानदार कलाकार शामिल हैं, जिनकी अदाकार...

कुर्सियों के सफ़ेदपोश रहनुमाओं बताओ मुझे मैं वोट क्यों करूँ

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**************वोट क्यों*************** कुर्सियों के सफ़ेदपोश रहनुमाओं बताओ मुझे मैं वोट क्यों करूँ तुम्हारे विकास की पर्ची देखे बिना सिर्फ नाम को सपोर्ट क्यों करूँ   युवा हूँ मैं पहला मतदान है मेरा स्वयं हित या देश हित देखूँ मैं मैं काम देखूँ मैं पहचान देखूँ या गलियों में बिखरे नोट देखूं मैं मैं चेहरा देखूँ या पहरा देखूं या फिर दुश्मनों की स्पोर्ट देखूँ मैं मैं सुनूँ तुम्हारे भाषण ध्यान से या पिछले वर्षों की रिपोर्ट देखूँ मैं तुम्हारे भाषण में बहकर मैं राष्ट्रीय छवि को भला चोट क्यों करूँ कुर्सियों के सफ़ेदपोश रहनुमाओं बताओ मुझे मैं वोट क्यों करूँ   पिछली बार जब आये थे तुम मुझे याद है जो वादे कर के गए थे विकास के नाम पर और लहर के झांसे में हमको भर के गए थे सबकी उम्मीदों को तोड़ा है जो तुम्हारे पीछे गाड़ी भर के गए थे एक भी न सुनी तुमने जब कभी तुम्हारे दर पर हम मर के गए थे फिर एक बार तुम्हे ही चुन कर मैं अपने मत का भी खोट क्यों करूं कुर्सियों के सफ़ेदपोश रहनुमाओं बताओ मुझे मैं वोट क्यों करूँ   किसान मरे, जवान मरे, मज़दूर तंग, बेटी मरे, व्यापारी डरते हैं समझ नही आता के क्यों पसन्द ...

बजरंग पुनिया के पत्तन की कहानी | बजरंग पुनिया का घमंड उसे ले बैठा | घमंड का सर नीचा

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जड़ों में बैठकर आकाश हथियाने चले थे  कुछ लोग जीत का विश्वास आजमाने चले थे छोटे परिंदे भी चीर देते हैं सीना आसमान का  भूलकर औकात झूट का परचम लहराने चले थे जीत कर लौटते तो भूल जाता जमाना गुनाह तेरे फूंके कारतूस देखो दुनिया को डराने चले थे   एशियन गेम्स में मिली करारी हार के बाद बजरंग पुनिया के समर्थन में उस के हिमायती व आंदोलनजीवी फिर से एक बार सामने आ रहे हैं । लगातार बताया जा रहा है के बजरंग भारत का हीरा है और बजरंग ने भारत के लिए कुश्ती में 21 मेडल्स लाने की बात कर रहे हैं जिसमें 7 गोल्ड मैडल हैं | आपको बता दे हाल ही में बजरंग पुनिया को एशियन खेलों में पैंसठ किलो भार वर्ग में करारी हार का सामना करना पड़ा है , इसे मात्र हार कहना हार का अपमान करने जैसा होगा यह मात्र हार नही है यह उस घमंड का चकनाचूर होना कहलाएगा जिसे बजरंग पुनिया वरिष्ठ खिलाड़ी होने को लेकर पाल बैठा था ।  बजरंग पुनिया को लगता था की आंदोलन से अर्जित किए गए उनके अनुभव से किसी भी देश के खिलाड़ी को चित्त किया जा सकता है । बजरंग को लगता था के किसानों के आंदोलन में खड़े होकर सूरजमुखी का MSP दिलवाना उसको एशिय...

"हरियाणा कविता: हरियाणा की धरोहर, सांस्कृतिक गौरव | लेखक: दीप जांगड़ा"

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**************** हरियाणा***************** हरियाणा मैं जन्म दिया तनै धन धन जननी माई कण कण मैं दिखै राम मनै छंद छंद मैं कविताई हरी की भूमि कहलाया तो मिल्या नाम हरियाणा जी छैल छबीले माणस सैं आडै दूध दही का खाणा जी आये गए कि इज्जत सै म्हारा सीधा सादा बाणा जी ज्ञान की बात करैं सारे आडै बुड्ढा हो चाहे स्याणा जी होक्के पै पंचात बैठ जया रीत सदा चली आई कण कण मैं दिखै राम मनै छंद छंद मैं कविताई गंठे गैल्यां रोटी खा लयाँ ना रीस करां हम खाणे की दुनिया मैं पूरी चौधर सै किते बूझ लियो हरियाणे की खेल सै कुश्ती और कब्बडी गात तोड़ दें याणे की खाड़यां मैं म्हारे छैल गाभरु माटी कर दें स्याणे की देश विदेश मैं गाडे सैं लठ खेलां मैं सै खूब चढ़ाई कण कण मैं दिखै राम मनै छंद छंद मैं कविताई सारे दुनिया मैं नां बोल्लै सै दादा लख्मीचंद बामण का किते नही पावै दुनिया मैं तीज त्यौहार यो साम्मण का नही पहरावा मिलै किते भी बावन गज के दाम्मण का ठंडी छाँ बरगे माणस ज्यूकर पेड़ होवै सै जाम्मण का हरदम बॉर्डर पै खड़े रहैं म्हारे सब तै घणे सिपाई कण कण मैं दिखै राम मनै छंद छंद मैं कविताई सांग रागणी के किस्से...