दो बख्तां का एक

 दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के भजन समझ कै बांच लियो मैं गीत बणा कै गा दयूं के

इश्क मुहोब्बत देख लिए जिस्मां के टुकड़े टोहन्दे हांडै
घर घर मैं पंचायती होगे इब बीज भीघन के बोंदे हांडै
दे कै भेत ढूंढ अपणे का दूसरे दरवाजै दुखड़े रौंदे हांडै
भूले कदर बुजुरगां की ज्यांतै तो अस्मत खोंदे हांडै
के बित्या के के होवेगा लिख राखी साच सुणा दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
दादा की उमर के माणस नै प्रधान कहण का रिवाज है
ढोल खो दिए बाजे खागे इब तो बस ढम ढम का साज है
गात कमाणा लोग भूल गे इब ढोलां मैं नकली नाज़ है
धरती बेच प्रदेश डिगर ज्यां किसनै किसकी लिहाज है
बुरे टेम खातर धर राखी उन बातां कै थापी ला दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
छाज रहे ना रही छालणी कित वें बैंजो घड़वे खोगे
मीठी बाणी कित धरदी रै लोग बाग इब कड़वे होगे
कडे कमरबंद नाड़े हैं इब कड़े सांझ अर पड़वे खोगे
क्यूं छोड़े धोती कुर्ते कड़े सिर के ताज वें खंडवे खोगे
तनै के बेरा बुढ़यां नै कह आज सारे राज खपा दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
क्यूं दादी की कहाणी खो दी कड़े दादा के कांधे हैं
साग भूल गे कुंधरे का आजकल तो घास नै रांधे हैं
कड़े बेचे बलधां के गाड़े इब क्यांतै कोन्या पांदे हैं
इब न्हाण कड़े हैं आसूज के क्यांतै नी बाधुआ गांदे हैं
रीत भुलाई संस्कार खो दिए आजे उल्टे ल्या दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
बाप के ऊपर हाथ करै आज वें बेटे भी बहादर होरे
बात चलावैं गाम गुहांड चौड़े होरे जाणु आदर होरे
जो गुरुआं का आदर करगे जमा पारस के पाधर होरे
जिसनै धन की कद्र करी ना राम कसम वैं लाधर होरे
सारा मुंह खुलवाओ तो बातां कै लिकडे ला दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
तीतरां की इब डार दिखै ना के देखी डुमणी घुग्गी रै
मोटरसाइकलां पै न्यार आज्या कड़े गई इब बुग्गी रै
ढूंढ पाट कै न्यारे होगे इब जगह जगह घली झुग्गी रै
बिसरी पान की बेग्गी लोगो खोई हुकम की दुग्गी रै
कठ्ठे हो कै ताश पीट ल्यां काट की चाल चला दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
बाजरे की हांडी भी खोई खो दी काढवणी माटी की
निंबुआ गैल्यां जाम्मण लागें कदर भूल गे खाटी की
टोकणी गई खुरचणा खोया गए भूल वा टिंडी चाटी की
लखमी के दर्शन नै तरसै वा पावन धरती जाटी की
नंगां के नंगड ल्ख्यारी होगे गावणिया नै ता दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
कुणब्यां का भाईचारा यू सरपंची का लेक्शन ले डुब्या
कई बीरां की शर्म नै तो यू इंस्टा का कैप्शन ले डुब्या
बाणी कती बेशर्म होगी गैल्यां गात का एक्शन ले डुब्या
दीप जांगड़ा क्यों आग्या तेरा शब्द सिलेक्शन ले डुब्या
गंदा लिख कै आगे नै होज्यां ख़ुद का मोल लगा दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
दो बख्तां का एक बखत इब सारी खोल बता दयूं के
भजन समझ कै बांच लियो मैं गीत बणा कै गा दयूं के
दीप जांगड़ा

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