अच्छा होगा

 **********अच्छा होगा**********

सब का चिठ्ठा खोल बता दूं तो कहना
मुझसे मेरा हाल न पूछो अच्छा होगा
अपना वक्त आएगा इस आस में जिंदा हैं
कब बदलेगा साल न पूछो अच्छा होगा
दौलत के दरिया में गोते खाती नाव दिखे
हम तो हैं कंगाल न पूछो अच्छा होगा
डूब रही है दुनिया ग़म के घोर अंधेरों में
हुक्मरानों का ख्याल न पूछो अच्छा होगा
नोच दरिंदे खाते हैं उस अबला की देह को
खूं में है अगर उबाल न पूछो अच्छा होगा
बिक जाते हैं मुर्दे और जिंदों की चिंता काहे
तुम काग़ज़ से सवाल न पूछो अच्छा होगा
कुर्सी खूब लुभावे है नेतागण निद्रा भोग में
जमीरों के कंकाल न पूछो अच्छा होगा
सच कहने की हिम्मत खोकर झूट पे पर्दा डालो
वर्ना हो जाएगा बवाल न पूछो अच्छा होगा
क्या क्या सुनना चाहते हो पर्ची लिख के रखो
और बाल की खाल न पूछो अच्छा होगा
लड़ने से डरते हो तो आंसूं पोंछ लो अपने
पर मुझसे मेरा रुमाल न पूछो अच्छा होगा
गरीब मिटाने लगे गरीबी मिटाने का वादा था
अब होगा कब अकाल न पूछो अच्छा होगा
शब्द दीवाने हैं लिखेंगे शब्दों को घटा बढ़ाकर
कहां मिल जाएगी ताल न पूछो अच्छा होगा
:-दीप जांगड़ा

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